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प्राणायामः परं तपः

 

प्राणायामः परं तपः
स्वामी विवेकानंद जी एक बार जर्मनी गये थे। वे वहाँ भारतीय दर्शन के प्रशंसक प्रोफेसर पाल ड्यूसन के यहाँ ठहरे थे। स्वामी जी एक काव्य-पुस्तक पढ़ रहे थे। प्रोफेसर उनके लिए चाय लेकर आये पर विवेकानंदजी कविता पढ़ने में इतने मग्न और एकाग्र थे कि उनका ध्यान पाल ड्यूसन की ओर गया ही नहीं। बहुत देर तक वे चाय लिये खड़े रहे। बाद में जब स्वामी जी की निगाह पड़ी तो उन्होंने क्षमा माँगी और प्रोफेसर को वह कविता सुनाने लगे, जो उन्हें बहुत पसंद आयी थी।
प्रोफेसर ने कहाः "स्वामी जी ! आप इस कविता को पहले से ही जानते होंगे ?"
स्वामी जी बोलेः "मैंने तो इसे आपके यहाँ पढ़ा है।"
पाल ड्यूसन आश्चर्यचकित होते हुए बोलेः "केवल एक बार ही पढ़ने से इतनी लम्बी कविता कैसे कंठस्थ हो गयी ?"
स्वामी जी बोलेः "ब्रह्मचर्य के पालन और प्राणायाम के अभ्यास से चित्त की एकाग्रता प्राप्त होने पर क्षमता आ जाती है।"
भगवान आद्य शंकराचार्य की स्मरणशक्ति इतनी प्रबल थी कि वे एक बार जो पढ़ या सुन लेते थे, वह उन्हें याद हो जाता था।
उनके शिष्य पद्मपाद का लिखा वेदान्त भाष्य मामा के यहाँ षड्यन्त्रपूर्वक आग में जलकर नष्ट हो गया। पद्मपाद को दुःखी देखकर जगदगुरु शंकराचार्य उसे सान्त्वना देते हुए बोलेः
"वत्स ! चिंता न करो। तुमने मुझे वह भाष्य एक बार सुनाया था, अतः वह मुझे सारा का सारा याद है।"
शंकराचार्य जी बोलते गये और पद्मपादाचार्य लिखते गये। वह ग्रंथ फिर से तैयार हो गया। शंकराचार्य अवतारी महापुरुष थे और वह प्राणायाम का चमत्कार था।
इस युग में भी परम पूज्य बापू जी के शिष्य वीरेन्द्र मेहता ने पूज्य बापू जी द्वारा बतायी गयी विशेष प्राणायाम की विधि का लाभ उठाकर 'ऑक्सफोर्ड एडवांस्ड लर्नर्स डिक्शनरी' के अस्सी हजार शब्द उनके अर्थ व पृष्ठ संख्या सहित याद करके 'लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्डस' में अपना नाम दर्ज करवाया है।
महर्षि पतंजलि कहते हैं-
धारणासु च योग्यता मनसः। (2.53)
'प्राणायाम से मन में विषय को धारण करने की योग्यता प्राप्त हो जाती है।'
'तैत्तीरीय उपनिषद्' में आता हैः
प्राणं देवा अनु प्राणन्ति। मनुष्याः पशवश्च ये।
प्राणो हि भूतानामायुः। तस्मात् सर्वायुष्मुच्यते।
'प्राण के बल से देवता, मनुष्य और पशु जीते हैं, प्राण सब भूतों की आयु है। अतएव वह 'सर्वायुष' कहलाता है।' प्राणायाम करने से व्यक्ति दीर्घायु होता है।
प्राणायाम से इन्द्रिय संयमः
रावण सरीखा योद्धा भी इन्द्रिय-लोलुपता के कारण मारा गया। तब मंदोदरी विलाप करती हुई कहती हैः "पूर्वकाल में इन्द्रियों को जीतकर तुमने तीनों लोकों पर विजय प्राप्त की थी। उस वैर का मानों स्मरण करती हुई इन्द्रियों द्वारा तुम जीत लिये गये हो।"
(वा.रा.यु.कां – 111.15-96)
मनु महाराज कहते हैं-
'अग्नि से तपाये जाने पर जैसे धातु का मल जल जाता है, उसी प्रकार प्राणवायु के निग्रह से इन्द्रियों के सारे दोष दग्ध हो जाते हैं।'
ततः क्षीयते प्रकाशवरणम्।
(योगदर्शनः 2.52)
'उससे (प्राणायाम से) ज्ञानरूपी प्रकाश को रोकने वाला पर्दा हट जाता है।' इस सूत्र पर महर्षि व्यास जी भाष्य करते हैं-
तपो न परं प्राणायामात्,
ततो विशुद्धिर्मलानां दीप्तिश्च ज्ञानस्य।
'प्राणायाम से बढ़कर दूसरा तप नहीं है, इससे सारे मल धुल जाते हैं और ज्ञानरूप दीपशिखा प्रदीप्त हो जाती है।'
प्राणायाम से रोग नष्ट होते हैं और शरीर में ओज, बल, स्फूर्ति बढ़ती है। प्रो. राममूर्ति अपने शारीरिक बल के लिए बहुत प्रसिद्ध थे। मोटर की गति रोक देना, लोहे की भारी साँकल तोड़ डालना, छाती पर से हाथी पसार करवाना इत्यादि अनेकों करतब वे दिखाते थे। वे कहते थेः 'ब्रह्मचर्य-पालन और नित्य प्राणायाम करके मैंने यह बल प्राप्त किया है। भारतीय संस्कृति के इन सबल साधनों द्वारा प्रत्येक पुरुष यह शक्ति प्राप्त कर सकता है।'
प्राणायाम से पक्वाशय की पेशियाँ बार बार संचालित होने से सुदृढ़ हो जाती है। फेफड़ों में पूरा श्वास भरने से उनका भी व्यायाम हो जाता है। प्राणायाम से फेफड़े, हृदय, यकृत, गुर्दे स्वस्थ रहते हैं। इस प्रकार शारीरिक, मानसिक, आध्यात्मिक सभी तरह से प्राणायाम हमारे लिए परम उपयोगी सिद्ध होता है।
प्राणायाम के साथ संयम, भगवन्नाम भी बहुत आवश्यक है। युक्ताहार-विहार रखने वाला व्यक्ति प्राणायाम का पूरा लाभ उठा सकता है। आत्मज्ञानी गुरु के मार्गदर्शन में रहकर किया गया अभ्यास आध्यात्मिक साधना-पथ में वायुयान की-सी तेजी ला देता है। (आश्रम द्वारा प्रकाशित पुस्तक 'पंचामृत' के पृष्ठ क्रमांक 350 पर प्राणायाम की विधि दी गयी है।
स्रोतः लोक कल्याण सेतु, अक्तूबर 2009
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  4/20/2012 9:40:26 PM
Laura 


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What I find so inetersting is you could never find this anywhere else.
  6/24/2010 6:09:22 AM
Ajay 


Labh 
Mujhe bhi Pranayam aur mantrajap se bahut labh hua hain, Iske liye Guruji aur meri mausiji ka koti-2 dhanyabad. Bal, samranshakti aur khush rehne laga hoon
  6/7/2010 2:27:28 PM
Shishya 


Ram Baan 
Pranayam karne se mere jeevan me asadhya ghatanayen hone lagin , Aur jo log mera mazak udate the ve peeche rah gaye or mein Videsh yatra mein Bapuji ki kripa se apne aap phunch saki, Meri Adton mein behaviour mein bhut sudhar hua. Har samaye acha lagta hai or problems mein bhi posetive attitute ke sath nivarn mil hi jata hai, 1 hour pranayam karen ke bad 23 hour aaram se beet te hain. Guru Dev ko Koti Koti Prnam or Meri Mataji or Nani ko bhi prnam jinki vajhe se mein Deeksha or pranayam jan saki
  5/13/2010 4:51:58 AM
Rambali Giri 


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I feel much concentration and spritual experience due to PRNAYAM.
  5/6/2010 7:38:52 AM
SUNIL SHARMA 


PRABHU VARDAAN 
Hum Bharatwaasi Param Dhanya aur Kritagya hain ke hamen viraasat me aise mahaan niyam aur sanskaar mile hain jo hamari unnati ke sopan hain. In prerna pathon par chalna aur unhe atamsaat kar lena ye hamaara param kartavya hai! HARI OM! HARI OM!
  5/3/2010 9:43:43 PM
kshama .s.kadam 


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sach-much pranayam ek divaya aushadhi aur chamatkari dean hai.KAR NE SE HI ANUBHAV AAYEGA.

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