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सभी धर्मों की एक पुकार, माता-पिता का करें सत्कार

                                         

                                                    सभी धर्मों की एक पुकारमाता-पिता का करें सत्कार 

(माता-पिता पूजन दिवस : 14 फरवरी) 

दुनिया के सभी धर्मों व सम्प्रदायों में माता-पिता का स्थान श्रेष्ठ माना गया है । हिन्दु, मुसलमानसिक्खईसाई व पारसी सभी अपने-अपने तरीके से माता-पिता के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं । 

हमारे देश में ऐसे दिव्य संस्कार अभी भी विद्यमान हैं किंतु पश्चिमी देशों में स्थिति चिंताजनक है ।  

 
इन्नोसंटी रिपोर्ट कार्ड के अनुसार 28 विकसित देशों मे हर साल 13 से 19 वर्ष की 12 लाख 50 हजार किशोरियाँ गर्भवती हो जाती हैं । उनमें से लाख गर्भपात कराती हैं व लाख 50 हजार कुँवारी माता बन जाती हैं । अकेले अमेरिका में हर साल लाख 95 हजार अनाथ बच्चे जन्म लेते हैं और 30 लाख किशोर-किशोरियाँ यौन रोगों के शिकार होते हैं । इसका एक प्रमुख कारण है विदेशों में वेलेंटाइन डे जैसी परंपरा को बढ़ावा देना । राजनीति शास्त्र के प्रफेशर जॉन जेडिलुलियो कहते हैं कि ‘‘धार्मिक संस्थाओं को सुदृढ़ बनाया जायजिससे बच्चों व युवाओं के मन में अच्छे संस्कार डाले जायें ।’’ 

 
संत श्री आसारामजी बापू युवक-युवतियाँ-बच्चों में अच्छे संस्कार आयें इसके लिए वेलेंटाइन डे मनाने के बदले मातृ-पितृ पूजन दिवस मनाने का आह्वान किया है । 

माता-पिता का पूजन सर्वोत्तम 

नैतिक मूल्यों के विकास के लिए किये जा रहे प्रयासों में माता-पिता का पूजन सर्वोत्तम है । अरबों-खरबों डॉलर खर्च करने पर भी विदेशों में नैतिक पतन का स्तर गिरता ही जा रहा है । जबकि माता-पिता का पूजन जैसे उन्नत संस्कारों का ही यह फल है कि 14 देशों के बच्चे व युवाओं में किये सर्वेक्षण में भारतीय सबसे अधिक सुखी और स्नेही पाये गये । लंदन व न्यूयार्क में प्रकाशित इस रिपोर्ट में कहा गया है कि इसका एक बड़ा कारण है  भारतीय लोंगो का पारिवारिक स्नेह व निष्ठा ।  

दुनिया के 167 देशों में मनाया जा रहा 14 फरवरी को माता-पिता पूजन महापर्व  

संत आशाराम बापू की प्रेरणा से पिछले साल भारत सहित दुनिया के 167 देशों में माता-पिता पूजन का महापर्व मनाया गया । देश-विदेश की मीडिया के सभी सज्जनगणमाण्य व्यक्तियों व सभी धर्मों के अग्रगण्यों ने इसे सराहा है । राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने भी इस अभियान के प्रति अपनी प्रसन्नता जताई है । अजमेर शरीफ के शाही इमामहजरत मौलाना असगर अली का कहना है कि ‘‘बापूजी ने एक बड़ी अच्छी शुरुआत की है ।’’ 

अमेरिका के न्यूयार्क टाईम्स ने भी बापूजी द्वारा प्रेरित इस माता-पिता पूजन अभियान की सराहना की है । न्यूजर्सी (यू.एस..) के सिनेटर सैम थॉम्पसन ने कहा कि ‘‘यह दुखद है कि ऐसी प्रथा हमारे अमेरिकन समाज में नहीं है । मैं संत आशारामजी बापू की प्रशंसा करता हूँ ।’’ 

बच्चों में माता-पिता के प्रति आदर का बीज बोकर हम अपने घर-परिवार में सौहार्दपूर्ण वातावरण का निर्माण कर सकते हैं । भगवान गणपति ने भी भगवान शिव और माता पार्वती का पूजन करके देवों में प्रथम पूजनीय होने का वरदान पाया था । बापूजी कहते हैं कि ‘‘सभी के माता-पिता चाहते हैं कि हमारी संतान ओजस्वी-तेजस्वी होबलवान-बुद्धिमान होस्वयं के पैरों पर खड़ी रहे और बुढ़ापे में हमारा ख्याल रखे  बच्चे हमारा आदर करेंऐसा सभी चाहते हैं और मैं वही कर रहा हूँ । विश्वमानव के मातृ-पितृ पूजन दिवस का फायदा मिलेऐसा हमने पिछले आठ वर्षों से अभियान शुरु किया है ।’’ 

 
अब तक लगभग सवा करोड़ से भी अधिक बच्चों ने सम्मिलित होकर अपने माता-पिता का पूजन किया है । छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने राज्य के सभी विद्यालयोंमहाविद्यालयों में 14 फरवरी को मातृ-पितृ पूजन दिवस मनाये जाने की घोषना की है । भेदभावरहित सभी धर्मों व जातियों के लिए कल्याणकारी इस पर्व को मनाने के लिए देश के अनेक राज्यों में भिन्न संस्थाओं ने इस पहल का स्वागत किया है । जनता में इसके प्रति बढ़ते आकर्षण व भागीदारी के कारण इस वर्ष भी यह पर्व पूरे विश्व में 14 फरवरी के पहले से ही मनाना शुरु हो गया है । सोशल मीडिया  जैसे ट्विटरफेशबुक पर इसकी काफी प्रसंशा की जा रही है । साथ ही इस अभियान से जुड़ भी रहे हैं ।  

स्थानिय श्री योग वेदांत सेवा समिति ने संपूर्ण शहरवासियों से आह्वान किया है कि अपने परिवार समाज व देश के मंगल के लिए इस महापर्व में बढ़चढ़कर भाग लें । इसे अपने घर में भी अपने अनुकूल पद्धती से मनायें । इसे मनाने की सरल विधि बताते हुए बापू कहते हैं कि ‘‘माता-पिता को स्वच्छ तथा ऊँचे आसन पर बिठाकर उनके माथे पर कुंकुम का तिलक करें । तत्पश्चात् माता-पिता के सिर पर पुष्प एवं अक्षत रखें तथा फूलमाला पहनायें । अब माता-पिता की सात परिक्रमा करें व उन्हें विधिवत् प्रणाम करें । फिर माता-पिता की आरती करें । 

बाद में माँ-बाप भी बच्चों को तिलक करेंसिर पर पुष्प व अक्षत रखेंफिर अपने गले की फूलमाला बच्चों को पहनायें और सिर पर हाथ घुमायेंशुभ आशीष दें । माता-पिता अपनी संतान को प्रेम से सहलायें । संतान अपने माता-पिता के गले लगे । यही है असली प्रेम-दिवस !’’ 

इसकी विधी माँ-बाप को भूलना नहीं पुस्तक में विस्तृत रूप से दी गयी है । 

 

 

  Comments

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Created by vikram vasant pendharkar in 2/15/2014 6:24:26 PMbapuji ham ne bahut kar liya par aap ko mukta nahi kar paye aap hi krupa kar ke aap ke mukta karne ka rasta bata do na. aap ke satsang ki samaj ko bahut jarurat hai. aap ka samay bahot bahumulya hai is liye aap juld bahar ake pune me pahla satsang karne ki krupa karna aap ka aur sirf aapka vikram.
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Created by sangita in 2/14/2014 10:00:48 PMshri shri Lakshmideviji mata amachi pita aasharamji hya doghanchya shri charani koti koti pranam .shri shri gurudev shri shri gurumai aap ki sadahi jay ho....om shiv om...om shakti om.....

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