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पूज्य बापूजी को आयुर्वेदिक चिकित्सा प्राप्त होगी

 

 

संत श्री आशारामजी बापू  के स्वास्थ्य को लेकर
भ्रामक प्रचार करनेवालों को करारा तमाचा

         त्रिनाड़ी शूल नामक बीमारी से ग्रसित पूज्य संत श्री आशारामजी बापू अब शिरोधारा से उपचार ले सकेंगे | इस बीमारी का उल्लेख बापूजी की वैद्य नीता द्वारा पहले भी कोर्ट में किया गया था | जिसमें उनका कहना था कि बापूजी को लगभग पिछले १३-१४ वर्षों से सिर के दाहिने हिस्से में भयंकर पीड़ा होती है । सतत घूमने से, जागरण और सतत सम्भाषण से अथवा जल-वायु के परिवर्तन से ये पीड़ा कभी-कभी भयानक रूप लेती है । इसे मॉडर्न मेडिसिन में ट्राईजेमिनल न्यूराल्जियाकहा गया है । ट्राईजेमिनल नर्व एक “Fifth cranial nerve” है, जिसकी तीन शाखाएँ हैं १. मेक्सिलरी २. मेंडिब्युलर ३ ओफ्थेल्मिक । अतः इसे त्रिनाड़ी भी कहा जाता है और क्योंकि ये दर्द इस नाड़ी से संबंधित है तो इसे 'त्रिनाड़ी शूल' कहा जाता है । आयुर्वेद में इसे अनंत वातकहा है और इसकी विस्तृत जानकारी आयुर्वेदिक ग्रंथ चरक संहिता”“माधव निदानऔर अष्टांग संग्रहमें शिरोरुक नामक प्रकरण में मिल सकती है । ट्राईजेमिनल नयूराल्जियाके बारे में आप किसी भी न्यूरोलॉजिस्ट या न्यूरो सर्जन से जान सकते हैं अथवा वेबसाइट्स पर इसकी जानकारी मिल जायेगी । इस बीमारी का इलाज शिरोधारा पद्धति से ही सम्भव है |

            पूज्य संत श्री आशारामजी बापू की मेडिकल रिपोर्ट नॉर्मल आने पर कई भ्रामक प्रचारकों ने बताया था कि बापूजी को ऐसी कोई भी बीमारी नहीं है | बापूजी की एमआरआई रिपोर्ट भी नॉर्मल है |’ पर इसकी सच्चाई मीडियावालों ने हमेशा दुनिया के सामने छुपायी जिसका खुलासा करते हुए नीता वैद्य ने बताया था कि " मैंने न्यायाधीश से ये निवेदन किया था कि ये बीमारी किसी भी प्रकार के एमआरआई अथवा सीटी स्कैन के द्वारा सिद्ध नहीं की जा सकती । इसका जो दर्द है वह सिर के एक अथवा दोनों तरफ, आँख के पास टेम्पोरल रीजन में या दाँतों के डीप रूट में अथवा सिर के आगे की ओर लेटरल हिस्से में (साइड की तरफ) उठता है । इस बीमारी को जानने का एक तरीका है डायग्नोसिस

          इस बीमारी का विस्तृत वर्णन करते हुए नीता वैद्य ने कहा जैसे किसीको अगर पेट में दर्द है लेकिन उसकी सोनोग्राफी रिपोर्ट आये कि “It’s absolutely normal.” (यह बिल्कुल ठीक हैं । ) लेकिन फिर भी मरीज तो कहता है कि मुझे दर्द है ।तो डॉक्टर पूछता है कि दर्द कब होता है ? मरीज कहता है कि ‘‘भोजन के २ घंटे बाद होता है, अधिक मिर्च अथवा तली हुई चीज़ें खाने से होता है ।’’ तो फिर डॉक्टर ये अंदाज़ लगाते हैं कि हो सकता है कि इन्हें अल्सर हो, पेप्टिक अल्सर हो । फिर धीरे-धीरे उस दिशा में जब उपचार शुरू हो जाते हैं तो इसका कन्फर्म डायग्नोसिस से ही होता है कि “He is suffering from peptic ulcer.” । तो पहले सोनोग्राफी में नहीं आया था तो इसका मतलब ये तो नहीं कि उसे अल्सर नहीं है । ऐसे ही किसी को अगर इस प्रकार से सिर में दर्द है तो कोई कहता है कि मुझे त्रिशूल है’, कोई कहता है मुझे माइग्रेन हैंया सीवियर हेडक है ।

          तो पूज्य बापूजी कोई वैद्यराज या डॉक्टर नहीं हैं, वे ब्रह्मज्ञानी संत-महापुरुष हैं । और उन्हें जो पीड़ा है वह उन्होंने व्यक्त करने के लिए एक शब्द का आधार लिया जो पुरानी, बोली-भाषा का प्रचलित शब्द है, । अब वह शब्द अगर मीडियावाले नहीं जानते, जोधपुर की पुलिस नहीं जानती तो इसका मतलब यह नहीं होता कि बापूजी को वह बीमारी ही नहीं है । बापूजी की जोधपुर में केवल एक एमआरआई जाँच करवायी गयी और ये कहा गया कि बापू को इस प्रकार की कोई पीड़ा नहीं है ।जबकि मैं जानती हूँ कि पिछले १३-१४ वर्षों से ये पीड़ा है और इसके कई प्रमाण मेरे पास हैं । देशभर के कई डॉक्टरों के प्रमाण पत्र इस समय मेरे पास उपलब्ध हैं ।’’ कई वर्षों से पूज्य बापूजी की छवि को धूमिल करने और समाज को गुमराह करने का प्रयास चल रहा है| अपनी रोटी सेकनेवाले लोगों ने बताया कि ऐसी कोई बीमारी नहीं होती हैपर आज जब सच सामने आया है तो कोई क्यों नहीं दिखा रहे है ? अगर त्रिनाड़ी शूल नामक कोई बीमारी ही नहीं थी जैसा कई प्रचार करनेवालों ने बताया तो कोर्ट ने कैसे पूज्य बापूजी का इस बीमारी के लिए इलाज करने की माँग को मान लिया है | बापूजी को तकलीफ थी इसीलिए बापूजी उपचार का निवेदन कर रहे थे पर प्रचार माध्यम द्वारा ऐसा दिखाया गया कि बापूजी ने कोई गलत वस्तु की माँग की है | अगर भारत का नागरिक भी स्वास्थ्य हेतु कोई अर्जी करता है तो उनकी छवि को धूमिल करना कहाँ का न्याय है ! इस बात से ये सिद्ध होता है कि न्यूज़ चैनलों का काम सिर्फ झूठी और बिकाऊ बाते दिखाना रह गया हैं और सच्चाई से उनका कोई लेना देना ही नहीं रहा है | क्या इनपे विश्वास किया जा सकता है ! इनके द्वारा दिखाये गए न्यूज़ कितने सच होते है इसका अंदाजा आप इस घटना से लगा सकते है |  

           ऐसे ही निंदक अमृत प्रजापति का झूठ भी समाज के सामने बड़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत कर मीडिया ने समाज को गुमराह करने की कोशिश की | अमृत प्रजापति ने बोला था कि बापूजी अफीम का उपयोग करते है |’ पर इस झूठ की पोल खोलते हुए नीता वैद्य ने बताया कि "एक साधारण-सी बात है कि ७५ वर्ष आयु का व्यक्ति अगर मानो १० साल से भी अफीम खाता होता तो क्या वो लाखों-लाखों लोगों के सामने ब्रह्मज्ञान का सत्संग कर पाता ? क्या वो दिन-रात मानव के कल्याण के लिये रत रह पाता ? क्या उसका शरीर इस बात के लिए सक्षम रहता ? क्या वे घंटो तक अपनी वाणी से सत्संग कर पाते ? असम्भव है | प्रबुद्ध समाज और लोग इसकी ओर अपनी बुद्धि से विचार करके देखें कि ये क्या हो रहा है ? आज आप ही कहते हो कि जोधपुर न्यायालय ने एक पैनल बनाया हैं जिसमें कई प्रकार के डॉक्टर हैं और बापू की एम.आर.आई. रिपोर्ट नार्मल है, सारे ब्लड इन्वेस्टिगेशंज नार्मल हैं |’ तो क्या अफीम खानेवाले व्यक्ति के ब्लड इन्वेस्टिगेशंज नार्मल आ सकते हैं ? उम्र से सम्बंधित होती हैं ये सारी चीज़ें |ओस्टियोबोरेटिक बदलाव होने लगते हैं लेकिन स्वामीजी की स्पाइन की जो एम.आर.आई. करायी गयी वह सही पायी गयी | तो स्वामीजी की हड्डियों में भी ओस्टियोबोरेटिक बदलाव नहीं हैं, ब्रेन में सेरिब्रल एंट्रोपिक बदलाव नही हैं, ब्लड में किसी भी प्रकार की इम्प्युरिटीज अथवा एबनोर्मलिटीज नहीं हैं | तो जैसा की ये वैद्य अमृत प्रजापति का कहना है कि स्वामीजी पिछले कई वर्षों से अफीम खा रहे हैं और मैं उन्हें बना-बना कर अफीम की, पंचेड नामक बूटी देता था, तो मैं ये निवेदन करती हूँ की उनकी ही जाँच हो जाये कि ये जो जानकारी है पंचेड बूटी बनाने की वो उन्होंने कहाँ से प्राप्त की ? अफीम उन्होंने कहाँ से प्राप्त किया ? और ये बना-बनाकर वो किसे देते आ रहे हैं ? और किसे अभी भी दे रहे हैं ? इसकी जाँच भी की जाये |”  

             समाज को अब यह समझना चाहिए कि संतों और समाज के बीच बुराई फैलाने का काम ये प्रचार माध्यम कर रहे हैं | इनका काम सिर्फ झूठी और मनगढ़ंत कहानियाँ बनाकर संतों को सताना ही रह गया है लेकिन न्यायलय ने उपचार की आज्ञा देकर इन चैनेलों के मुहँ पर करारा तमाचा मारा है | देश की जागरूक जनता इन बिकाऊ चैनलों के झाँसे में न आये अपितु इनका बहिष्कार करें |

  Comments

At last partly justice done
Created by Shekhar in 12/13/2013 9:13:33 AMIt is nice to hear that Pujjya Bapuji was permitted to give ayurvedic medicine. In fact out honourable judges should recommend to take ayurvedic medicines only for others also as Allopathy medicines suffer from so many fatal side effects that almost kill the patient. So hope that there should be special genuine team of aurveidc doctors available.
One most important thing which is not to be forgotten is that real Bapuji is totally different from Body . It is like Sun is always free in the sky and its reflection in the, say, mirror is taken as real sun and that mirror son is kept in a prison. So like real sun can not be imprisoned, real Bapuji can never be imprisoned. So pl.do notcommit mistake to consider Bapuji as common human being.
In fact, false alligator should withdraw the case at once and should not be real sufferer in the time to come for false allegation.

sadho sadho
Created by om kunal in 12/6/2013 9:44:36 PMhari om om om jai sai ..... no words to say thanks to papuji to save my life style om om papuji humain aapke sare dard mil jaye bhagwan jai ho satya ki wijay hogi
Tatics to delay the hearing of pujya Bapu ji
Created by Sugam in 12/6/2013 4:34:02 PMCan any one tell why there is delay in hearing of the case before court?. Why the prosecutor often comes up with an excuse as a result the hearing gets postponed. Why something is not being done by Bapu ji's lawyer. It's becoming pathetic, as on one hand Bapu ji health deteriorating and on the other these people are playing with Sadhak's sentiments. Is not there any way by which we can compel the prosecutor wing to let the hearing start?

Enough is enough. Even High Court has directed the session court to speed up the case as there is no strong evidence against Bapu ji. It seems when new government takes up the charge (i.e. BJP) then only we can hope something correct happening.

thank u judge sahab.
Created by dipin gulati in 12/6/2013 10:52:51 AMkahi na kahi ab court ko bhi lagta ha ki param pujia babu ji ko false allegation ma fasaya ja raha hai.
judge ko ander sa to pata hai ki bapu ji nirdosh hai........................ hari om.

Der Aye Darust Aye
Created by Anonymous in 12/5/2013 7:38:54 PMWe are grateful to the honorable Court for granting permission for Ayurvedic treatment to Bapuji. If this permission had been given earlier then the pain which Bapuji has suffered could have been avoided. We have read that Justice Delayed is Justice Denied.The honorable court may please see to it that no one suffers from delay in their decision.Truth and only truth should triumph.
thanks
Created by karuna nirvane in 12/5/2013 6:07:21 PMhum bahut khush hai hamare Bapuji ko ayurvedik treatment mili. thanks to everyone.
thanks
Created by sachin in 12/5/2013 3:11:43 PMHARI OM,
GOOD TO HEAR THAT BAPUJI WILL TAKE AYURVEDIC TREATMENT . MY THANKS TO HON'BLE COURT FOR THE PERMISSION.

For treatment
Created by GURMUKH D. KATARIA in 12/5/2013 11:25:28 AMBadi parsanta kee bat hai k BAPU ko aruvedic chiktsa pardhan kee jayege magar bahut pahle milnichahethi itne samaye se unko takleef sahni padee phir bhi bahut bahut dhanyavad. HARI OM.
Prabhu Teri Jai Ho
Created by Sadhak in 12/5/2013 10:40:28 AMPrabhu Teri Jai Ho...Gurudev Teri Jai Ho....Narayan Hari...Narayan Hari....Hari Om...Hari Om....Hari Om
देर आये दुरुस्त आये
Created by mahesh wayde in 12/5/2013 9:31:56 AM

चलो देर से ही सही नायालय ने गुरुदेव कि ओशोधपचार के लिए मान्यता तो दे दी , हरी ॐ हरी ॐ हरी ॐ

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