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आपदा पीड़ितों के लिये सहायता सेवा केंद्र निरंतर जारी

 

 

 

 

 

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                       संत श्री आशारामजी आश्रम,ब्रह्मपुरी,ऋषिकेश

                                             प्रेस नोट                                                                                                                                           रविवार, 23 जून 2013

पूज्य संत श्री आशारामजी बापू और लाखों साधको ने उत्तराखंड आपदा पीड़ितों को दी आध्यात्मिक श्रद्धांजली,उत्तराखंड आपदा मे मृत्यु नही भक्तों की हुई सदगति                                                                                              – संत श्री आशारामजी बापू

संत श्री आशारामजी बापू आश्रम ऋषिकेश द्वारा आपदा पीड़ितों के लिये सहायता सेवा केंद्र निरंतर शुरू, पहाड़ों मे प्रतिदिन पहुचाई जा रही जीवन जरुरत की वस्तुये 

ऋषिकेश- सम्पूर्ण विश्व में आध्यात्मिक क्रांति के प्रणेता भारतीय संस्कृति के प्रमुख स्तंभ विश्व विख्यात संत श्री आशारामजी बापूजी आश्रम द्वारा उत्तराखंड के आयी प्राकृतिक मे प्रभावित आपदा पीड़ितों की निरंतर सेवा जारी है|हरिद्वार और ऋषिकेश आश्रम के द्वारा आपदा पीड़ितों के लिये खोल दिये गये है|यहां रहने व भोजन की व्यवस्था की गयी है| है|पिछले दिनो चार धामो सहित पहाड़ों  मे विभिन्न स्थानो पर अचानक आयी प्राकृतिक आपदा से पीड़ितों के लिये संत श्री आशारामजी आश्रम,ब्रह्मपुरी ऋषिकेश शाखा द्वारा श्री नगर से आगे जहा मार्ग बंद है|ऐसे स्थानो के बडी संख्या मे सेवादारो के साथ भोजन सामग्री,तैयार भोजन,नाश्ता  (नमकीन,पैकेट) दवाईयां,बरसाती,फिल्टर पानी आदि जीवन जरुरत की विभिन्न वस्तुये पहुचाई गयी है | साथ ही ऋषिकेश मे एक स्थान से दुसरे स्थान पर आपदा पीड़ितों के लिये वाहन व्यवस्था उपलब्ध कराई गयी है | गढवाल बस स्टैंड के सामने सहायता सेवा केंद्र की स्थापना की गयी है | जहां नाश्ता भोजन की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है| इन सभी सेवा कार्यो मे श्री योग वेदांत सेवा ऋषिकेश के साथ ही संपूर्ण उत्तराखंड के हजारो साधक व समितिया लगी है|रुद्रप्रयाग,गोचर,धन्सली मे राहत सामग्री पहुचाई गई है| पूज्य संत श्री आशारामजी बापू ने रविवार को अलीगाँव बदरपुर, दिल्ली में आयोजित अपने देड दिवसीय सत्संग में उतराखंड में हुई प्राकृतिक आपदा में सभी मृतात्माओं को उपस्थित लाखों साधकों के साथ आध्यात्मिक श्रद्धांजली अर्पित की | पूज्य बापूजी ने उनकी सदगति हेतु विशेष प्रार्थना करवाई कि हे श्रद्धालु आत्माओं तुम पंचभूतों का शरीर नहीं अपितु ऐसी आत्म सत्ता थे और अभी भी हो जिसे ऐसी आपदा तो क्या महाप्रलय भी नहीं मार सकता | भगवान के धाम में ऐसी आपदा से भले ही तुम्हारे शरीर की म्रत्यु हो गयी हो लेकिनं तुम्हारी तो सदगति ही हुई है, तुम्हारा शरीर नष्ट हुआ है तुम नहीं, अपने नित्य शुद्ध-बुद्ध स्वरुप की ओर गति करना| ऐसे ही सभी श्रद्धालुओ के परिवारजनों को सांत्वना देते हुए उनकी दुःख सहने की शक्ति और समता की प्राप्ति के लिए भी पूज्य बापू ने प्रार्थना करवाई| उन्हें अपने पावन सन्देश में पूज्यश्री ने कहा कि उनका नाम लेकर यही शुभ भावना करें कि तुम भगवान के धाम से सत्गति को प्राप्त हुए हो तुम संबंधों की मोह ममता में न फँसकर अपने नित्य शुद्ध-बुद्ध स्वरुप आत्मा को जानकर मुक्त हो जाना| 

 

  Comments

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Created by harish in 6/26/2013 9:38:23 AMhari om. haan ye baat sahi hai jab jab bhagvan evam unki prakriti ke saath chhedchhad karne ki koshish ki gai tab tab unone apna rodra rup dikhaya hai . itihas iski gavahi kai pramano ke sath de sakta hai. atah koi bhi sarkar ya individual ho ase savdhan hone ki zarurat hai .hari omNew Comment
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Created by Dushyant in 6/24/2013 8:39:32 PMBahut Sadhuwad
Hariom Kya yeh sab dhari devi mandir aur prtima ke saath ki gayi ched chad ka parinam hai ??????????
Created by Akshay Kanwar in 6/24/2013 10:51:35 AMउत्तराखंड त्रासदी: प्राकृतिक आपदा या देवी का अभिशाप ?

उत्तराखंड की जनता का कहना है कि धारी देवी प्राचीन काल से उत्तराखंड की रक्षा करती आ रही हैं... वे देवभूमि में आनेवाले श्रद्धालुओं की रक्षक हैं... लेकिन बांध बनाने के लिए धारी देवी को उस स्थान से हटा दिया गया जहां वे बरसों से देवभूमि की रक्षा कर रही थीं...

उमा भारती जी ने 4 महीने पहले उत्तराखंड सरकार से मंदिर नहीं हटाने को कहा... सभी साधू संतो ने भी सरकार को मना किया था... लेकिन सरकार ने 16 तारीख को मंदिर से मूर्ति हटा दी और उत्तराखंड में उसी दिन प्रलय आ गयी...

गढ़वाल क्षेत्र के श्रीनगर में अलकनंदा नदी के किनारे पहाड़ी पर स्थित माता का मंदिर है... मान्यता है कि हर दिन माता यहां तीन रूप में नज़र आती हैं... पहला रूप कुमारी कन्या, दूसरा रूप युवती का और तीसरा वृद्ध माता का...

बताया जाता है कि माता के सिर पर छत लगाने की कई कोशिशें की गई लेकिन कभी लगाया नहीं जा सका... वर्तमान मंदिर के स्वरूप में भी माता की मूर्ति के ऊपर छत नहीं है...

जिस दिन ये दैवी आपदा हुई , मतलब शनिवार की शाम को, उसी दिन शाम को "धारी देवी" के मंदिर... को विस्थापित किया गया था- लगभग शाम को ६ बजे और केदारनाथ में जो भारी तबाही हुई वो भी लगभग ८ बजे शुरू हुई... मौसम विभाग के अनुसार जून के मानसून में 70mm बारिश का अनुमान होता है, परन्तु वहा 300mm बारिश हुई...

माँ धारी देवी बड़ी प्रत्यक्ष शक्ति है उस क्षेत्र की... वहां के निवासी ये सब जानते है... किन्तु कांग्रेस सरकार वहां पर एक बाँध बना रही है जिससे मंदिर को uplift करने की जरुरत थी...

उत्तरांचल के लोगों, चारों धाम की यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं की रक्षक मानी जाने वाली ''धारी देवी'' की प्राचीन प्रतिमा को जबर्दस्त जनविरोध के बावजूद भी उत्तरांचल सरकार ने एक कम्पनी के हित साधने के लिए हटा दिया था... मूर्ति के साथ हुई इस शर्मनाक सरकारी छेड़छाड़ और शुरू हुई विनाशलीला के दुष्परिणाम आज हम-आप-सब देख रहे हैं...

इस सरकारी कुकृत्य के खिलाफ उमा भारतीजी तीव्र जनांदोलन छेड़े हुए थीं... पिछले माह 16 तारीख को लाल कृष्ण अडवाणी के साथ जाकर उन्होंने राष्ट्रपति से भी धारी देवी मन्दिर की रक्षा की गुहार लगाई थी... सुषमा स्वराज और अरुण जेटली ने भी प्रधान मंत्री से इसको लेकर विरोध जताया था..

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Created by Nilesh pawar in 6/24/2013 9:55:56 AMGuru dev apki jay ho, wo chahte sab jholi bharle neej aatma ka darshan karle

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