Sant Shri
  Asharamji Ashram

     Official Website
 

Register

 

Login

Follow Us At      
40+ Years, Over 425 Ashrams, more than 1400 Samitis and 17000+ Balsanskars, 50+ Gurukuls. Millions of Sadhaks and Followers.

 

Diwali Bhandara Images
/Portals/9/UltraPhotoGallery/6156/1331/thumbs/15526.DSC_0281.JPG
DSC_0281
10/26/2011 12:14:00 PM
DSC_0382
10/26/2011 5:23:00 PM
DSC_0381
10/26/2011 5:23:00 PM
DSC_0196
10/26/2011 12:04:00 PM
DSC_0380
10/26/2011 5:22:00 PM
DSC_0379
10/26/2011 5:22:00 PM
DSC_0378
10/26/2011 5:22:00 PM
DSC_0377
10/26/2011 5:22:00 PM
DSC_0372
10/26/2011 5:21:00 PM
DSC_0346
10/26/2011 4:43:00 PM
DSC_0265
10/26/2011 12:13:00 PM
DSC_0258
10/26/2011 12:12:00 PM
DSC_0255
10/26/2011 12:12:00 PM
DSC_0249
10/26/2011 12:12:00 PM
DSC_0231
10/26/2011 12:10:00 PM
DSC_0202
10/26/2011 12:05:00 PM
DSC_0151
10/26/2011 11:54:00 AM
DSC_0148
10/26/2011 11:54:00 AM
DSC_0141
10/26/2011 11:53:00 AM
DSC_0005
10/26/2011 10:50:00 AM
DSC_0139
10/26/2011 11:51:00 AM
DSC_0138
10/26/2011 11:50:00 AM
DSC_0137
10/26/2011 11:50:00 AM
DSC_0131
10/26/2011 11:48:00 AM
DSC_0111
10/26/2011 11:46:00 AM
DSC_0100
10/26/2011 11:45:00 AM
DSC_0024
10/26/2011 11:00:00 AM
DSC_0083
10/26/2011 11:43:00 AM
DSC_0080
10/26/2011 11:42:00 AM
DSC_0070
10/26/2011 11:41:00 AM
DSC_0063
10/26/2011 11:40:00 AM
DSC_0051
10/26/2011 11:34:00 AM
DSC_0050
10/26/2011 11:33:00 AM
DSC_0047
10/26/2011 11:30:00 AM
DSC_0046
10/26/2011 11:30:00 AM
DSC_0045
10/26/2011 11:29:00 AM
DSC_0043
10/26/2011 11:28:00 AM
DSC_0026
10/26/2011 11:00:00 AM
DSC_0023
10/26/2011 11:00:00 AM
DSC_0006
10/26/2011 10:50:00 AM
DSC_0004
10/26/2011 10:50:00 AM
DSC_0044
10/26/2011 11:28:00 AM
DSC_0087
10/26/2011 11:43:00 AM
DSC_0058
10/26/2011 11:40:00 AM
Share Pictures

 Email the pictures or videos of the bhandaras and other service activities organized by your samiti or ashram at events@ashram.org

Bhandara Video

Article List
दिवाली भंडारा सेवाकार्य

  दमोह  ( म.प्रदेश )   यहाँ   पूज्यश्री   का   सत्संग   का   आयोजन   किया   था  |  बापूजी   के   आदेशानुसार   वहाँ   के ...
Read More..


प्रश्नोत्तरी

  आप   लोग   ये   जो   सेवा   कर   रहे   हैं   उसका   उद्देश्य   क्या   है ..  
Read More..


पूजन एवं हवन विधि

  आचमन: निम्न मंत्र पढ़ते हुए तीन बार आचमन करें |  ‘ॐ केशवाय नम:, ॐ नारायणाय नम:, ॐ माधवाय नम: | फिर यह मंत्र बोलते हुए हाथ धो लें | ॐ हृषीक...
Read More..


पूज्यश्री का संदेश

  "यह  (चारित्रिक)  आरोप बेबुनियाद हैं, साजिश  है | मेरी सच्चाई मेरे साथ है | भारतीय संस्कृति  के खिलाफ बड़ा गहरा षड्यंत्र चल रहा हैं | अत: भारत के...
Read More..


सुप्रचार कैसे करें ?

  पूज्य बापूजी कि दीपावली पर पावन संदेश "सभी साधक पहले जैसे दीपावली मनाते थे, अभी भी वैसे ही मनाये | जो आत्मा अंदर है, वही आत्मा बाहर भी है | मैं ...
Read More..


Read Article
प्रश्नोत्तरी

 1.   आप लोग ये जो सेवा कर रहे हैं उसका उद्देश्य क्या है.. इसकी विस्तृत जानकारी दीजिये? 

  

दीवाली एक उत्सव है उल्लास का आनंद कास्नेह मिलन काटूटे हुए दिलों को जोड़ने का,निराशा कि खाई को पार करने काबुझे हुए दीपक जलने काज्ञान के प्रकाश से जीवन को सुखमय बनाने काबापू जी कहते हैं कि: 

दिवाली में ४ चीजे करते हैं 
१)घर का कचरा बाहर निकाल कर साफसुथरा करते ऐसे फालतू वासना का कचरा बाहर निकालो… अध्यात्मिक दिवाली मनाओ…. 
२)घर में नई चीजे लाते हैं  “दुसरे का हीत दुसरे का मंगल कैसे हो” ये आप के जीवन में नई चीज लाओ… दुसरे सुखप्रसन्नता और सन्मानित कैसे रहे ऐसा हीत का चिंतन करो तो आप लोक लाडले हो जायेंगे 
३)दिए जलाते… अपने को परिस्थितियों में पीसो मत….ज्ञान का दिया जलाओ …..दुःख आया तो गलती हुयी हैगलती कैसे मिटे धन के संग्रह में लगे तो गलती हुयी तो इनकम टैक्स का दुःख हुआ….संसार दुखालय है….आसक्ति से पंगा छुडाओ ….सुख आया तो बाटों ..सुख उदार होने के लिए आता ..ऐसा ज्ञान का दिया जलाओ .. 
४) मिठाई खाते और खिलाते…. प्रभु का आनंद अपने जीवन में भरोख़ुद भी प्रसन्न रहो….दूसरो को भी मधुरता दो..मधुराधिपतये मधुरं मधुरं… अर्थात मधुमय व्यवहार करो .. 
(किसी गरीब बस्ती में जाकर मिठाई खिलाना और गरीब के घर में भी दिया जला के आना) 

दीपावली का धार्मिक पहलू बाहर के दीप जला कर बहार के अंधकार को दूर करने कि प्रेरणा देता है तो सामाजिक पहलू सम्राजिक समरसता का उज्जवल प्रकाश फैलाने कि प्रेरणा देता है.  

जो भी लोग इस सेवा में भाग लेते हैंउनका उद्देशीय यही होता है कि पूज्य बापू जी के ज्ञान का दीपक घर घर जलाये - घर घर में ज्योत जगाएं – गरीबो की सेवा हो जाए और हम सब मिलकर अध्यात्मिक दीवाली मनाये. 

 
 

2.      कब से ये सेवा कार्य चल रहा है और उसकी शुरुआत कैसे हुई? 

  

ये दिव्य सेवा कार्य कई वर्षो से चल रहा है – जब तक मै इस आश्रम से जुड़ा हूँतब से तो देख ही रहा हूँइन दिनोंबापू दूर दराज़ के पिछड़े गरीब आदिवासी इलाकों में जा जा कर स्वयं उनमे कपडेअनाजबर्तन और जीवन उपयोगी सामग्री तथा भोजनमिठाई और नगद दक्षिणा देकर उन गरीबो के आसू पोछ कर अनोखी दीवाली मानते हैं. साथ साथ जन्म जन्म के पाप ताप को नष्ट  करके इह लोक सुखी पर लोक सुखी कर देने वाले सत्संग अमृत का पान भी करते हैं. मेरे बापू जी कि तो रोज दीवाली होती है. 

  

3.      आप लोग किन-किन जगहे पर ये गतिविधि करते हैं? 

  

बापूजी स्वयं ही इस सेवा के लिए बहुत सजग और प्रयासपूर्ण रहते हैंवो हर एक सेवा क्षेत्र कि जानकारी लेते हैं. पूर्व तयारी से लेकर सम्पन्न होने तक कि हर एक कदम पर वो निगरानी रखते हैं कि कहीं कोई कमी न हो या अव्यवस्था न हो जाए... 

जहा जहा सम्भव होता है..बापूजी खुद अपने हाथों कि सेवा सामग्री वितरिते करके आशीर्वाद देते हैंजहा जाना सम्भव नहीं होतावहाँ अपना सन्देश और प्रसाद भेजते हैं. 

  

 
4. कौन लोग इस सेवा के लाभार्थी होते हैं? 

  

जहा गरीब गुरबे हैजो लोग दीवाली पर नए कपडे मिठाई नहीं खरीद पातेऔर जहाँ जहाँ भी ज़रुरत होती हैवहाँ वहाँ पर सेवा कार्य होते हैंबापू दूर दराज़ के पिछड़े गरीब आदिवासी इलाकों में जा जा कर स्वयं उनमे कपडेअनाजबर्तन और जीवन उपयोगी सामग्री तथा भोजनमिठाई और नगद दक्षिणा देकर उन गरीबो के आसू पोछ कर अनोखी दीवाली मानते हैं. साथ साथ जन्म जन्म के पाप ताप को नष्ट करके इह लोक सुखी पर लोक सुखी कर देने वाले सत्संग अमृत का पान भी करते हैं. 

  

5. क्या सेवा पाने वाले लोगो कि संख्या की कोई निश्चित सीमा निर्धारित करते हैं आप? 

  

नहीं – जिस क्षेत्र में भी सेवा कार्य होता हैवहाँ के सभी लोग लाभान्वित होते हैं. इसके लिए आश्रम कि तरफ से सेवा सामग्री दी जाती है और बहुत से साधक इस दिव्य दीवाली और पूज्य श्री के सानिध्य का लाभ लेते हैं. 

  

6. इस सेवा में जुड़ने के बाद सेवा पाने वाले लोगों के बारे में आपको क्या अनुभव आये हैं? 

  

जो आदिवासी लोग इस सेवा का लाभ लेते हैंवो इस अध्यात्मिक दीवाली मना कर खुद को धन्य महसूस करते हैं. हमारे पास कई ऐसे लोगों के अनुभव हैं जो पूज्य श्री के सनिधिया से लाभान्वित हुए हैं. ये अध्यात्मिक दीवाली से सेवा दारों और गरीबों दोनों को लाभ मिलता है. पूरी जानकारी पाने के लिएजाएँ संत श्री आसाराम जी आश्रम कि वेबसाइट ashram.org  पर. 

 
 

7. इस सेवा को पूरी करने में किस तरह की चुनौतियां सामने आती हैं? 

 
 

अगर चुनौतियों की बात करें तो जहाँ बापू हैं और उनका ज्ञान प्रसाद हैवहाँ पर सब चुनौतियाँ भी सरल लगने लगती हैं. जहाँ दूर दराज़ के इलाकों में ये सेवा कार्य होते हैंवहाँ पर आस पास के क्षेत्रों के लोगों को एकत्रिक करके उन्हें कपडेअनाजबर्तन और जीवन उपयोगी सामग्री तथा भोजनमिठाई और नगद दक्षिणा आदि विस्तारित कि जाती हैंइस सब का पूरा इंतेज़ाम बापूजी कि देख रेख में होता है और लाखों लोगो को ये दिव्य लाभ मिलता है. 

  

8. समाज में इस सेवा कार्य को किस तरह देखा जाता है? 

  

इस सवाल का उत्तर तो आप उन लोगों से पूछ सकते हैं जिनको इसका दिव्या लाभ मिला है. हमारे पास कई ऐसे लोगों के अनुभव हैं जो पूज्य श्री के सानिध्य से लाभान्वित हुए हैं. सुदर्शन न्यूज़ औरA2Z न्यूज़ चैनल ने इस सेवा कार्यों को अपने चैनलों पर समय समय पर दिखाया हैजो सेवक इस सेवा में शामिल होने का सौभाग्य पाते हैंवो भी अपने गुरु के दैवी कार्य में सम्मिलित होकर खूब शांति और आनंद का अनुभव करते हैं. 

  

9. इस सेवा में सेवा देने वाले सेवा दारी कौन होते हैं? 

  

इस सेवा में सेवा देने वाले ज्यादातर आश्रम के समर्पित साधक होते हैं. इसके अलावाकई समितियों के संचालक और बहुत से साधक इस दिव्य सेवा में शामिल होते हैं.  अंत मेंजो भी इस सेवा में सम्मिलित होते हैंवो अपने को धन भागी मानते हैं. 

  

10. इस सेवा से जुड़ने के बाद आप का अपना अनुभव बताएं? 

  

पहली बात तो अपने गुरु कि दैवी कार्य में सम्मिलित होने का हमें सौभाग्य मिलता है जिससे हमें खूब शांति और आनंद का अनुभव होता है. दूसरी बातहमें पूज्य श्री के सानिध्य का निरंतर लाभ मिलता है और यह अध्यात्मिक दीवाली उनके साथ मनाने का मौका मिलता है. हम सब सेवक अपने को खूब खूब धन भागी मानते है जो इस दैवी कार्य में हमें सम्मिलित होने के शुभ अवसर मिला. आप साधकों के अनुभव आश्रम की वेबसाइट ashram.org पर पढ़ सकते हैं. 

 


 


View Details: 1134
print
Copyright © Shri Yoga Vedanta Ashram. All rights reserved. The Official website of Param Pujya Bapuji